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खेल अधिकारी (अंपायर और रेफरी)

"आपका काम गेंद के लिए अंपायरिंग करना है न कि खिलाड़ी के लिए" - बिल क्लेम
क्या आप खेलों में अपना करियर अंपायर या रेफरी के रूप में बनाना चाहते हैं?

यदि हां तो इसकी जांच - पड़ताल करें!!
  • क्या आपके पास एक अच्छी दृष्टि है?
  • क्या आपको खेलों में रुचि है?
  • क्या आपकी कम्युनिकेशन स्किल अच्छी है?
  • क्या आपको नियमों का अध्ययन करने और उसके अनुसार निर्णय लेने में मज़ा आता है?
  •  क्या आप एक अच्छे पर्यवेक्षक हैं?
यदि उपरोक्त सभी प्रश्नों का उत्तर हां में है, तो आपको एक अच्छा अपांयर और रेफरी के रुप मे करियर बनाने से कोई नहीं रोक सकता।  भारत में प्रतिभाओं की कमी नहीं है और यदि अवसर की बात करें तो बहुत से ऐसे क्षेत्र है जिसमें आप लगन और मेहनत से बहुत जल्द ही बड़ा मुकाम पा सकते है। ऐसे में यदि हम खेल में भविष्य बनाने की बात करें तो युवा प्रतिभाओं के लिए खेल में करियर विकल्पों की कमी नहीं है। खिलाड़ी के तौर पर करियर खत्म होने के बाद या करियर ना बना पाने पर भी आप खेलों से मैच रेफरी एवं अंपायर के रुप में जुड़ सकते हैं। 

अंपायर और रेफरी खेल टीम का एक हिस्सा हैं। वे खेल के नियमों और विनियमों की निगरानी करते हैं और उन्हें लागू करते हैं, ताकि खेल निष्पक्ष रूप से खेला जाए। वे खेल के स्तर और प्रकार के अनुसार किसी का ध्यान रखते हैं और दबाव का सामना करते हैं। प्रमुख लीगों या पेशेवर खेलों में तत्काल रिप्ले या हॉफ आई या कंप्यूटर सॉफ्टवेयर जैसे टीम बीप टेस्ट जैसी तकनीक का उपयोग, बॉडी बाइट निर्णय लेने के लिए अंपायरों, रेफरी या खेल अधिकारियों पर दबाव को कम करने में मदद करता है। इस कार्य में पूर्वनिर्धारित प्रक्रिया और नियमों के साथ डेटा और विवरण के साथ व्यवहार करना शामिल है। कुछ बेसबॉल अंपायरों का उदाहरण जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत मामूली लीग और हाई स्कूल बेसबॉल मैचों के साथ की है, वे हैं - मिच जॉनसन, लेनी वेग, जरीद पुटमैन, जॉन रोजर्स और माइक पेस्का आदि है। आप भी अपने करियर की शुरआत छोटे मैच में रेफरी एवं अंपायर बनकर कर सकते हैं।

अंपायर एंव रेफरी के कार्य

अंपायर मुख्यतः क्रिकेट की अंपायरिंग करने के लिए जाने जाते हैं। वहीं रेफरी फुटबॉल, टेनिस, हॉकी इत्यादि मैच में होते हैं। अंपायर के पास फील्ड में कोई भी निर्णय लेने की स्वतंत्रता रहती है। वह जो भी निर्णय लेता है दोनों टीमों के खिलाड़ियों को उसे स्वीकारना ही होता है। क्रिकेट के अंपायर सुबह 9 बजे स्टेडियम में पहुंचते हैं और सुबह 10 बजे टीम के अधिकारियों से पिच की तैयारियों के बारे में बातचीत करते हैं। इसके बाद 11 बजे सुबह मैदान में एक चक्कर लगाकर घोषणा करते हैं कि खेल कितने बजे शुरू होगा और कितने बजे खत्म। इसके अलावा खेल शुरू होने के साथ अंपायर खिलाड़ी के आउट होने, छक्के, चौके, वाइड/नो बॉल, आदि की जानकारी विभिन्न इशारों से देते हैं। इसके अलावा अगर खिलाड़ी को रौशनी से समस्या हो रही होती है तो वह इस संबंध में स्क्वेयर लेग अंपायर से बातचीत करता है। यही काम अन्य खेल के मैच रेफरी का भी होता है। इन्हें जिस खेल के लिए रखा जाता है उसके नियम एवं  खेल की बारीकियों की इन्हें पूरी जानकारी होती है। अंपायर एवं रेफरी के निर्णयों को ही अंतिम निर्णय माना जाता है। 

अंपायर, रेफरी और खेल अधिकारियों की भूमिका

  • अंपायर, रेफरी और खेल अधिकारी, खेल के नियमों और विनियमन को बनाए रखते हुए खेल की घटनाओं, खेल या प्रतियोगिताओं की देखरेख करते हैं, ताकि खेल को निष्पक्ष रूप से खेला जाए।
  • उन्हें खिलाड़ियों के प्रदर्शन का निरीक्षण करने और तदनुसार स्कोर, अंक, दंड देने के लिए अपना निर्णय पारित करने की आवश्यकता होती है।
  • उन्हें खिलाड़ियों या अन्य खेल अधिकारियों को किसी भी उल्लंघन के खिलाफ संकेत देने, दावों और शिकायतों का निपटान करने की आवश्यकता होती है।
  • वे उपकरणों का निरीक्षण करते हैं और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए खिलाड़ियों की जांच करते हैं।
  • काम की गतिविधियों को शेड्यूल करना, खेल शुरू करना, रोकना और समय का ध्यान रखने का कार्य करते हैं। 
  • खेल के नियमों को लागू करना, नियमों का उल्लंघन करने वाले खिलाड़ियों को दंडित आदि करते हैं। 
  • खिलाड़ियों के बीच संघर्षों को हल करना और दूसरों के साथ बातचीत करना इनका कार्य है।
  • निर्णय लेने के लिए डेटा और ज्ञान का उपयोग करना।
  • सहकारी कामकाजी माहौल विकसित करना।
  • पर्यवेक्षकों, साथियों या अधीनस्थों के साथ संवाद करना।
  • खिलाड़ियों, साथियों, अन्य खेल अधिकारियों को परामर्श और सलाह प्रदान करना।
  • विकासशील रणनीतियों के लिए यह जिम्मेदार होते हैं।
  • इन्हें ड्रग्स टेस्ट से गुजरना पड़ता है और सामान्य परीक्षणों में भी खिलाड़ियों की शारीरिक और ड्रग टेस्ट रिपोर्ट का निरीक्षण करना पड़ता है।


अंपायरों, रेफरी और खेल अधिकारियों के कौशल

सवांद कौशल: खिलाड़ियों के बीच विवादों को सुलझाने के लिए एथलीटों को निर्देश देने, मसलों का हल निकालने के लिए इन्हें अच्छे संचार कौशल की आवश्यकता होती है। संवाद के द्वारा ही यह समस्याओं का निवारण करते हैं।

निर्णय लेने का कौशल: अंपायर, रेफरी और खेल अधिकारी को फाउल, स्कोर, पेनल्टी, अंकों के संबंध में निर्णय पारित करने में सक्षम होना चाहिए। उनके निर्णयों के अधार पर ही किसी टीम की जीत या हार सुनिश्चित होती है।

अच्छा निरीक्षकः इन्हें मैदान पर खिलाड़ियों की हर कार्रवाई के लिए उत्सुकता और स्पष्ट रूप से निरीक्षण करने में सक्षम होना चाहिए। इन्हें निर्णय पारित करने के लिए भी त्तपर रहना चाहिए।

अच्छी दृष्टि: खिलाड़ियों को नियमों के अनुसार न्यायसंगत खेल खिलाने के लिए एक अच्छी दृष्टि की आवश्यकता होती है। कौन-कहां क्या गलत या सही कर रहा है ये देखना अंपायर एवं रेफरी का काम होता है।

अच्छी सहनशक्ति: एक अंपायर या रेफरी की नौकरी में मैदान में खड़े होना, दौड़ना या चलना अधिक शामिल होता है, जिसके लिए अच्छी सहनशक्ति होना आवश्यक है।

टीम कार्यकर्ता: निर्णय लेने के लिए, अंपायर, रेफरी और खेल अधिकारी एक टीम के रूप में काम करते हैं। इसके लिए अच्छा तालमेल होना अति आवश्यक है।

अच्छा श्रोता: इन्हें दूसरों को सुनना चाहिए और उसके द्वारा पारित निर्णय पर विवाद के समय औचित्य प्रदान करना चाहिए।

महत्वपूर्ण सोच: न्याय करने या निर्णय लेने में इन्हें सक्षम होना चाहिए, उचित तर्क और वितर्क के साथ समाधान या निष्कर्ष प्रदान करना चाहिए।

अच्छा शिक्षार्थी: निर्णय लेने या न्याय करने की नई तकनीकों को सीखने, समझने और कार्यान्वित करने में सक्षम इन्हें होना चाहिए।

नेतृत्व: एक टीम का नेतृत्व, राय और निर्देश देने में अपांयर एवं रेफरी को सक्षम होना चाहिए।

तनाव सहिष्णुता: आलोचकों द्वारा की गई टिप्पणियों को सहन करने में सक्षम होना चाहिए। इन्हें मैदान पर शांत रहकर एकाग्र होना चाहिए।

पक्ष और विपक्ष

पक्ष
  • पेशेवर खेलों में त्वरित रिप्ले जैसी तकनीक का उपयोग मानवीय त्रुटि को कम करने और कार्य को आसान बनाने में मदद करता है।
  • कम उबाऊ के रूप में हर खेल अलग रोमांच देता  है।
  • एक खेल का एक हिस्सा बनने के लिए अच्छा तरीका आपको पसंद है उसी में कार्य करें।
  • अनुभवी अंपायरों, रेफरी, खेल अधिकारियों की मांग के रूप में एक आजीवन नौकरी की अधिक संभावना है।
  • पूर्ण भुगतान अंपायरों, रेफरी या खेल अधिकारियों द्वारा प्राप्त किया जाता है, भले ही मैच बारिश या खराब मौसम जैसी अप्रत्याशित स्थितियों के कारण न हो।
  • अंशकालिक स्कूल खेल की घटनाओं को एक अंशकालिक काम के रूप में लिया जा सकता है।

विपक्ष
  • अनियमित काम के घंटे।
  • हर कोई आपके निर्णय की सराहना करता है या आप पर चिल्लाता है एवं आलोचना करता है।
  • आपको अपने लिए स्वंय खड़े होने की जरूरत है क्योंकि कोई भी आपका पक्ष नहीं लेगा।
  • खेल के दौरान अंपायरों, रेफरी या खेल अधिकारियों के लिए कोई ब्रेक नहीं होता।
  • एक खेल में अंपायर, रेफरी या खेल अधिकारी का कोई विकल्प नहीं।
  • सप्ताहांत, दिन-रात और छुट्टियों पर भी काम करना होता है।
  • यात्रा शामिल है।
  • पारित किए गए निर्णय पर आपको विवाद का सामना करना पड़ सकता है।
  • क्षेत्र की नौकरी के लिए खेल के समय चौकस और खड़े रहने की आवश्यकता होती है।

शैक्षणिक योग्यता

अंपायर या रेफरी बनने के लिए आपको खेल के नियमों को जानना आवश्यक है। आपको खेल की बेहतरीन समझ होनी चाहिए।एक अच्छा व्यवस्थापक होना चाहिए जो मैदान में हर बिगड़ती बात को आराम से संभाल सके। साथ ही किसी भी परिस्थिति में शांत रहने वाला होना चाहिए। गुस्सैल व्यक्ति अंपायर नहीं बन सकता। इसके लिए किसी विशेष डिग्री की आवश्यकता नही होती। आप खेल आयोजकों द्वारा आयोजित परीक्षा में पास होकर भी अपने पंसदीदा खेल की अपंयारिंग या रेफरी कर सकते हैं।

करियर संभावनाएं

क्रिकेट के अंपायर बनने के लिए राज्य स्तरीय स्पोर्ट बॉडियों द्वारा समय-समय पर प्रायोगिक व लिखित परिक्षाएं आयोजित की जाती हैं। अगर व्यक्ति इस परीक्षा में उत्तीर्ण हो जाता है तब वह बीसीसीआई के द्वारा आयोजित की जाने वाली अंपायरिंग परीक्षा में बैठने के लिए योग्य माना जाता है। अगर व्यक्ति इस दूसरे स्तर की परीक्षा को पास कर लेता है तो उसे बीसीसीआई पैनल के लिए चुन लिया जाता है और कुछ दिनों तक राष्ट्रीय मैचों में अंपायरिंग करने के बाद व्यक्ति को अंतरराष्ट्रीय मैचों में अंपायरिंग करने का मौका दिया जाता है। वहीं आप इन अन्य खेलो में भी करियर संभावनाएं तलाश सकते है।

• बेसबॉल अंपायर
• बास्केटबॉल रेफरी
• चौकीदार
• फुटबॉल रेफरी
• हॉकी रेफरी
• हूफ और शू निरीक्षक
• रेस स्टार्टर
• जज
• अंपायर
• सॉफ्टबॉल अंपायर
• खेल अधिकारी
• खेल सांख्यिकीविद्

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