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न्यायाधीश

यदि आप कानून के अच्छे जानकार है, यदि आप देश की सेवा करना चाहते हैं, यदि आप में सही और गलत की पहचान करने का कौशल है तो आप न्यायधीश यानि जज के रुप में करियर बना सकते हैं।  मजिस्ट्रेट भारत की कानूनी प्रणाली में सबसे प्रतिष्ठित स्थिति है। भारत जैसे लोकतांत्रिक और गणतंत्र देश में जहां मजिस्ट्रेट और न्यायाधीशों की भूमिका को कम नहीं किया जा सकता है। वास्तव में वे ऐसे अधिकारी होते हैं जो संविधान में शामिल कानूनों को प्रशासित, व्याख्या और लागू करने के लिए जिम्मेदार होते हैं या राज्य और केंद्र की विधायिका द्वारा बनाए जाते हैं। भारत में संविधान में न्याय व्यवस्था को पूरी तरह से स्वतंत्र रखा गया है, जिससे की वह कार्यपालिका द्वारा किये गए गलत कार्यो पर अंकुश लगा सके, इसलिए हमारे यहाँ जज का पद बहुत ही अहम् होता है। भारत में  सर्वोच्च न्यायलय  के मुख्य न्यायधीश की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती और अन्य न्यायधीशों की नियुक्ति मुख्य न्यायधीश की सलाह पर राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, इसी प्रकार सभी राज्यों के उच्च न्यायालयों में मुख्य व अन्य न्यायधीशों की नियुक्ति राज्यपाल के द्वारा की जाती है, और इनकी नियुक्ति के बाद इन्हें केवल महाभियोग के द्वारा ही हटाया जा सकता है, 

न्यायाधीश एक ऐसा व्यक्ति है जो कानूनों के संबंध में सुनवाई और परीक्षणों के आधार पर अपना निर्णय देते है | एक न्यायाधीश के समक्ष नागरिक विवाद, यातायात के उल्लंघन और व्यापार विवाद के निर्णय हेतु प्रस्तुत किये जाते है | इस प्रकार के विवादों को सुनकर ,साक्ष्यों के आधार पर उपयुक्त निर्णय देने का अधिकार एक जज को प्राप्त है ,और जज द्वारा दिया गया यह निर्णय सर्वमान्य होता है |

भारत में न्यायाधीश (जज) की 4 श्रेणियां हैं

एक मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट
न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी;
न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय श्रेणी; तथा
कार्यकारी मजिस्ट्रेट
 

न्यायाधीश (जज)  की भूमिका

  • अनुसंधान कानूनी मुद्दे सुलझाना।
  • दस्तावेज़ों से जानकारी जैसे कि गति, दावे के आवेदन या रिकॉर्ड को पढ़ें और उनका मूल्यांकन करना।
  • विरोधी पक्ष द्वारा दलीलें सुनना और सुनने के बाद तर्क पढ़ना।
  • यदि निर्धारित की गई जानकारी चार्ज, दावे या विवाद का समर्थन करती है, तो सजा निर्धारित करना।
  • नियम और कानून के अनुसार प्रक्रिया चल रही है या नहीं यह तय करना।
  • निर्णयों, निष्कर्षों, या समझौतों तक पहुँचने के लिए कानूनों, विनियमों, या पूर्वनिर्धारणों का विश्लेषण, अनुसंधान और लागू करना।

न्यायाधीश (जज)  के कौशल

संचार कौशल: जजों को आम आदमी के मामले में कानून की व्याख्या करने में सक्षम होना चाहिए और सभी स्तरों पर लोगों के साथ संवाद करने की क्षमता होनी चाहिए।

महत्वपूर्ण तर्क कौशल: न्यायाधीश, मध्यस्थ और सुनवाई करने वाले अधिकारियों को कानून के नियम लागू करने चाहिए। वे अपनी निजी मान्यताओं को कार्यवाही में हस्तक्षेप नहीं करने दे सकते।

निर्णय लेने का कौशल: न्यायाधीश, मध्यस्थ और सुनवाई अधिकारी तथ्यों को तौलने, कानून या नियमों को लागू करने और अपेक्षाकृत जल्दी निर्णय लेने में सक्षम होने चाहिए।

श्रवण कौशल: जानकारी का मूल्यांकन करने के लिए न्यायाधीशों, मध्यस्थों और श्रवण अधिकारियों को जो कहा जा रहा है उस पर पूरा ध्यान देना चाहिए।

पढ़ने का कौशल: जज, मध्यस्थ, और सुनवाई अधिकारी बड़ी मात्रा में जटिल जानकारी से महत्वपूर्ण तथ्यों का मूल्यांकन और अंतर करने में सक्षम होना चाहिए। उनके अंदर पढ़ने का कौशल होना महत्वपूर्ण है।

लेखन कौशल: न्यायाधीश, मध्यस्थ, और सुनवाई अधिकारी अपील या विवाद पर सिफारिशें या निर्णय लिखते हैं। उन्हें अपने निर्णय स्पष्ट रूप से लिखने में सक्षम होना चाहिए ताकि सभी पक्ष निर्णय को समझ सकें।

शैक्षणिक योग्यता

लॉ में स्नातक करने वाले छात्र मजिस्ट्रेट बनने के योग्य हैं। आवेदन करने के समय उनकी आयु 21 से अधिक होनी चाहिए और 35 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। जिन उम्मीदवारों ने एलएलएम की डिग्री पूरी कर ली है, वे भी आवेदन करने के पात्र हैं। उम्मीदवारों को अपनी अंतिम परीक्षा में न्यूनतम 55% अंक प्राप्त करने चाहिए। अभ्यर्थी को बारवीं की परीक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य है, इसके बाद यूनिवर्सिटी द्वारा प्रवेश परीक्षा का आयोजन किया जाता है, जिसमे सफल होने के बाद आपको बीए एलएलबी में प्रवेश मिल जायेगा जिसकी अवधि पांच वर्ष है, उत्तीर्ण करके एलएलबी के तीन वर्षीय कार्यक्रम में प्रवेश प्राप्त कर सकते है |

न्यायाधीश (जज) की करियर संभावनाएं

एलएलबी की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद आप के पास अधिवक्ता के अतिरिक्त कई विकल्प खुल जाते है, आप एक मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब आसानी से प्राप्त कर सकते है, अनुभव बढ़ने के बाद आप सरकारी या प्राइवेट विभाग में  लीगल कंसल्टेंट का कार्य कर सकते है | अनुभव के आधार पर वकीलों की नियुक्ति ,राज्य पुलिस, राजस्व एवं न्यायिक विभागों में की जाती है । विभिन्न स्तर के न्यायालयों में ,जिला एवं सत्र न्यायाधीश, न्यायिक दंडाधिकारी एडवोकेट जनरल, सब मजिस्ट्रेट लोक अभियोजक ,नोटरी एवं शपथ पत्र आयुक्त के पद उपलब्ध हैं । भारत सरकार और राज्यों में अटॉर्नी जनरल के पद पर कार्य कर सकते है, यह बहुत ही एक्सपर्ट और अनुभवी होते हैं, इसके आलावा आप अध्यापन के क्षेत्र में जाने के लिए एलएलएम और एलएलडी कर सकते है जिसमे की अत्यधिक सम्मान प्राप्त होता है, इसके अतिरिक्त आप भारतीय और मल्टीनेशनल कंपनियों में लीगल एडवाइजर के रूप में कार्य कर सकते है |

कानूनी और समानांतर सेवाओं के अन्य करियर की सूची नीचे दी गई हैं:

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