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वकील

यदि आपको हर बात में तर्क ढूंढना अच्छा लगता है, यदि आप वाद-विवाद में आनंद लेते हैं, यदि आपमें बहस करने की क्षमता है, यदि आपकी कानून में रुचि है तो आप वकालत में करियर बना सकते हैं।  वकील भारत में सबसे अधिक मांग वाले करियर में से एक हैं।  वकील वह व्यक्ति होता है, जो कानूनी दांवपेचों को जानने और समझने में कुशल हो। एक अन्य परिभाषा पर गौर करें, तो लॉयर किसी सरकार या उसकी एजेंसी द्वारा अधिकृत वह व्यक्ति होता है, जो लॉ की प्रैक्टिस करने के अलावा अपने क्लाइंटों को कानूनी मुद्दों पर सलाह देने का कार्य करता है। किसी आम व्यक्ति की दृष्टि से देखें, तो लॉयर वह व्यक्ति है, जो किसी व्यवस्था (खासकर वैधानिक) की खामियों को तलाशने में दक्ष होता है। कानून के ये पेशेवर अपने क्लाइंट के लिए वकील और सलाहकार (एडवाइजर) की भूमिका निभाते हैं। दीवानी (सिविल) या फौजदारी (क्रिमिनल) मामलों में ये वादी (कम्प्लेनेंट) या प्रतिवादी (डिफेंडेंट) का संबंधित अदालतों में पक्ष रखते हैं। वह अदालत में अपने क्लाइंट की ओर से मुकदमा दायर करते हैं और उसके पक्ष को लेकर बहस भी करते हैं। वह किसी मामले विशेष के लिए कानूनी स्थितियों को स्पष्ट भी करते हैं। एडवाइजर या सॉलिसिटर के रूप में वह अपने क्लाइंट को परामर्श देते हैं कि उनके (क्लाइंट के) मामले से संबंधित तथ्यों पर कौन-सा कानून किस तरह लागू होगा। अदालत में मामला पहुंचने पर सॉलिसिटर संबंधित मामले की पैरवी करने वाले वकील को जरूरी सलाह भी देते हैं।

वकालत के प्रकार

क्रिमिनल लॉ- इसे लॉ की दुनिया का सबसे प्रचलित कानून माना जाता है। इस कानून से हर छात्र का सामना पड़ता है। हालांकि इसमें भी शुरुआती चरण में कई तरह की दिक्कतों से दो-चार होना पड़ता है।

कॉरपोरेट लॉ- वर्तमान समय में वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए कॉरपोरेट लॉ की उपयोगिता बढ़ गई है। इसके तहत कॉरपोरेट जगत में होने वाले अपराधों के लिए उपाय या कानून बताए गए हैं। 

साइबर लॉ- हर क्षेत्र में कंप्यूटर के बढ़ते उपयोग से साइबर क्राइम का भी ग्राफ बढ़ा है। आज इस कानून का विस्तार आम आदमी के साथ-साथ लॉ फर्म, बैंकिंग, रक्षा आदि कई क्षेत्रों में हो रहा है। इस कानून के तहत साइबर क्राइम के मुद्दों और उस पर कैसे लगाम लगाई जा सकती है, इसकी जानकारी दी जाती है।
टैक्स लॉ- इस शाखा के अंतर्गत सभी प्रकार के टैक्स जैसे इनकम टैक्स, सर्विस टैक्स, सेल टैक्स से जुड़े मामलों को वकीलों की सहायता से निपटाया जाता है।

पेटेंट अटॉर्नी- पेटेंट अटॉर्नी, पेटेंट लॉ का काफी प्रचलित शब्द है। इसका मतलब है कि एक ऐसा अधिकार, जिसके तहत कोई व्यक्ति अपना पूर्ण स्वामित्व रखता है। बिना उसकी मर्जी या सहमति के कोई अन्य व्यक्ति उस अधिकार का प्रयोग नहीं कर सकता। 

बैंकिंग लॉ- जिस तरह से देश की विकास दर में वृद्धि हो रही है, ठीक वैसे ही बैंकिंग क्षेत्र का दायरा भी बढ़ रहा है। इसमें खासतौर पर लोन, लोन रिकवरी, बैंकिंग एक्सपर्ट आदि से संबंधित कार्यो का निपटारा होता है।

फैमिली  लॉ- यह क्षेत्र महिलाओं का पसंदीदा क्षेत्र है। इसके अंतर्गत पर्सनल लॉ, शादी, तलाक, गोद लेने, गाजिर्यनशिप एवं अन्य सभी पारिवारिक मामलों को शामिल किया जा सकता है। लगभग सभी जिलों में फैमिली कोर्ट की स्थापना की जाती है, ताकि पारिवारिक मामलों को उसी स्तर तक सुलझाया जा सके।

वकीलों की भूमिका

वकील आमतौर पर निम्नलिखित करते हैं:
  • सरकारी एजेंसियों के सामने या निजी कानूनी मामलों में अदालतों में ग्राहकों को सलाह देना और उनका प्रतिनिधित्व करना।
  • अपने ग्राहकों और अन्य लोगों के साथ संवाद करना।
  • कानूनी समस्याओं का अनुसंधान और विश्लेषण करना।
  • व्यक्तियों और व्यवसायों के लिए कानून, और नियमों की व्याख्या करना।
  • अपने ग्राहकों या अन्य लोगों को लिखित या मौखिक रूप से तथ्य प्रस्तुत करना और उनकी ओर से बहस करना।
  • कानूनी दस्तावेज, जैसे कि मुकदमे, अपील, वसीयत, अनुबंध और कर्मों को तैयार और दर्ज करना।
  • वकील, जिसे लॉयर भी कहा जाता है, अधिवक्ता और सलाहकार दोनों के रूप में कार्य करते हैं।

वकीलों  के कौशल

विश्लेषणात्मक कौशल: वकीलों को बड़ी मात्रा में जानकारी का विश्लेषण करने और अपने ग्राहकों को समस्याओं या मुद्दों को हल करने में मदद करने में सक्षम होना चाहिए।

पारस्परिक कौशल: वकीलों को एक भरोसेमंद संबंध बनाकर अपने ग्राहकों का सम्मान और विश्वास जीतना चाहिए ताकि ग्राहक सहज महसूस करें और अपने मामले से संबंधित व्यक्तिगत जानकारी साझा करें।

समस्या को सुलझाने का कौशल: वकीलों के पास अच्छा समस्या-समाधान होना चाहिए वकीलों के लिए सबसे अच्छा बचाव या सिफारिश तैयार करना महत्वपूर्ण है।

अनुसंधान कौशल: सभी वकीलों को आमतौर पर ग्राहक के लिए कानूनी सलाह या प्रतिनिधित्व तैयार करने के लिए अनुसंधान कौशल की आवश्यकता होती है।

बोलने का कौशल: वकीलों को उनकी ओर से बोलने के लिए उनके ग्राहकों द्वारा काम पर रखा जाता है। वकीलों को स्पष्ट रूप से उपस्थित होने और एक न्यायाधीश और जूरी को सबूत समझाने में सक्षम होना चाहिए।

लेखन कौशल: वकीलों को दस्तावेज तैयार करते समय सटीक और विशिष्ट होना चाहिए, जैसे कि वसीयत, ट्रस्ट और अटॉर्नी की शक्तियां इत्यादि की जानकारी होनी चाहिए।

शैक्षणिक योग्यता

कानून के क्षेत्र में वकील के रुप में करियर बनाने के लिए आपको कक्षा 12वीं की परीक्षा पास करनी होगी। 12 वीं कक्षा पूरा करने के बाद, वे एक एकीकृत 5-वर्षीय कार्यक्रम का पीछा कर सकते हैं। 5-वर्षीय एलएलबी डिग्री प्रदान करने वाले कई विश्वविद्यालय हैं, और इस पाठ्यक्रम में प्रवेश संबंधित विश्वविद्यालयों द्वारा आयोजित प्रवेश परीक्षा पर आधारित है। सबसे महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षा कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (CLAT) है, जिसे पूरे भारत में 14 राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए स्वीकार किया जाता है। सीएलएटी अंग्रेजी, तार्किक तर्क, कानूनी योग्यता, प्राथमिक गणित और सामान्य जागरूकता पर उम्मीदवारों का आकलन करता है।

ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद आप 3 साल की एलएलबी डिग्री भी चुन सकते हैं। आप किसी भी स्ट्रीम में अपनी स्नातक की डिग्री कम से कम 50 प्रतिशत अंकों के साथ पूरी कर सकते हैं। 3-वर्षीय पाठ्यक्रम प्रदान करने वाले कुछ विश्वविद्यालयों में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय, पंजाब विश्वविद्यालय, सरकारी लॉ कॉलेज (मुंबई), और अन्य शामिल हैं।
अंत में, एक वकील बनने के लिए अधिवक्ता अधिनियम 1961 द्वारा विनियमित किसी भी राज्य बार काउंसिल में एक वकील के रूप में नामांकन करना होगा। पंजीकरण के बाद, एक को अखिल भारतीय बार परीक्षा (एआईबीई) को स्पष्ट करना होगा। परीक्षा बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित की जाती है, और एक बार जब आप इसे साफ़ कर देते हैं, तो आपको अभ्यास का प्रमाण पत्र मिल जाता है।

भारत में वकीलों की करियर संभावनाएं

भारत में एलएलबी पूरा करने के बाद, आप या तो अभ्यास शुरू करना चुन सकते हैं, या पढ़ाई जारी रख सकते हैं। आप अपने रुचि के क्षेत्र में गहराई से ज्ञान प्राप्त करने के लिए एलएलएम कोर्स का विकल्प चुन सकते हैं। एक आपराधिक वकील, एक कॉर्पोरेट वकील या एक सिविल वकील बनने का विकल्प चुन सकता है। आर्टिकलशिप या पढ़ाई के दौरान किसी सॉलिसिटर फर्म में जूनियर के रूप में काम किया जा सकता है। यहां भी जूनियर को वकालती पेशे से जुड़े रोजमर्रा के काम (मसलन केस को पढ़ना, सूट फाइल करना और नोटिस तैयार करना आदि) करने होते हैं।  कुछ वर्षो के अनुभव के बाद जूनियर अपने वरिष्ठों के समान ही दक्ष हो जाते हैं। इसके बाद वह किसी भी सॉलिसिटर फर्म में सॉलिसिटर बन सकते हैं। मौजूदा वक्त में लॉ ग्रेजुएट के लिए भरपूर संभावनाएं हैं। वह एडवोकेट के रूप में किसी न्यायालय में प्रैक्टिस करने के अलावा किसी कॉर्पोरेट फर्म के लिए भी काम कर सकते हैं। इसी तरह राज्यों के लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित की जाने वाली न्यायिक सेवा परीक्षा को पास करके जज भी बना सकता है। वकालत का लंबा अनुभव होने पर सॉलिसिटर जनरल या पब्लिक प्रोसिक्यूटर बनने का भी अवसर होता है। 

इसके अलावा उनके पास टैक्स, एक्साइज, पेटेंट, लेबर और इंवायरन्मेंटल लॉ आदि से संबंधित लीगल कंसल्टेंसी फर्मो में काम करने का भी विकल्प होता है। वह विभिन्न ट्रस्टों के लिए ट्रस्टी के रूप में और प्रिंट या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया संगठनों में लीगल रिपोर्टर के रूप में भी काम कर सकते हैं। 

कानूनी और समानांतर सेवाओं के अन्य करियर की सूची नीचे दी गई हैं:

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