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भारत में सिविल सेवा

सिविल सेवाओं को आज युवाओं द्वारा एक प्रतिष्ठित करियर के रूप में माना जाता है। यूपीएससी बोर्ड द्वारा आयोजित भारतीय सिविल सेवा परीक्षा देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक है। इसके बावजूद, इस प्रतिष्ठित सेवाओं में शामिल होने के लिए हर साल सैकड़ों युवा आवेदन करते हैं। लेकिन असफलताओं के बावजूद लोग इस परीक्षा के लिए क्यों आकर्षित होते हैं। क्या यह प्रतिष्ठा, आदर्शवाद, शक्ति की स्थिति है। शायद इस सब का उत्तर नई भर्तियों के सपने उन लाखों लोगों के साथ जुड़े हुए हैं जिनकी आवाजें हमारे द्वारा कभी नहीं सुनी जाती हैं।

कोई भी शिक्षित युवा जब अपने करियर के बारे में सोचता है तो वह तीन बातों को सबसे अधिक महत्व देता है- पद, प्रतिष्ठा और जॉब सुरक्षा। ये तीनों इच्छाएं किसी करियर में पूरी हो सकती हैं तो वह है सिविल सेवा। सिविल सर्विसेज एकमात्र ऐसा करियर है, जो व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा और सामाजिक दायित्व, दोनों के बीच संतुलन स्थापित करता है। यही वजह है कि मेडिकल, इंजीनियरिंग और प्रबंधन जैसे रोजगारमुखी क्षेत्रों को छोड़ कर देश के लाखों युवा सिविल सेवा में जाने के लिए किस्मत आजमाते हैं।

स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद, युवा परीक्षा की तैयारी करने वाले प्रमुख परीक्षाओं में से एक सिविल सेवा है। यह स्थिरता, सुरक्षा और सम्मान प्रदान करती है जो कोई अन्य नौकरी नहीं दे सकती। सिविल सेवाओं के वेतन और भत्ते महान हैं और कोई लाभ भी कमा सकता है, और बोनस के रूप में प्रोत्साहन और वेतन भी एक विशेष अवधि के बाद बढ़ जाता है। इस नौकरी ने समाज में सम्मान बनाए रखा है और सरकार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। वे राष्ट्रों के काम को बनाए रखने में मदद करते हैं और सभी क्षेत्रों में शांति और सुरक्षा स्थापित करने का कार्य करते हैं। देश सेवा करने का एकमात्र सबसे अच्छा जरिया सिविल सेवा है।

भारतीय शासन व्यवस्था में सिविल सेवा के अंतर्गत सरकार के सभी असैन्य सरकारी विभाग आते हैं, जिनके कार्यो को बांटा जाता है- केंद्रीय सिविल सेवा तथा प्रांतीय सिविल सेवा में। केन्द्रीय सिविल सेवा के अधिकारियों का चयन संघ लोक सेवा आयोग करता है और राज्य के अधिकारियों का चयन प्रांतीय लोक सेवा आयोग। केन्द्रीय सिविल सेवा दो वर्गो में विभाजित है- अखिल भारतीय सेवाएं और केन्द्रीय सेवाएं। भारतीय प्रशासनिक सेवा और पुलिस सेवा अखिल भारतीय सेवाएं हैं, जो केंद्र व राज्य, दोनों सरकारों के तहत आती हैं।

इस सेवा का महत्त्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इसमें कार्यों की विविधता होती है। व्यापक प्रकार के कार्य, सिविल सेवा से संबंधित होते हैं, जैसे- कानून-व्यवस्था बनाये रखना, विकासात्मक कार्य, आपदा प्रबंधन, भारत का विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रतिनिधित्व करना, समाज के हाशिये पर स्थित लोगों, जैसे- दलित, अनुसूचित जाति/जनजाति, महिलाओं, अल्पसंख्यकों को शसक्त बनाना, उनके जीवन को उपर उठाना इत्यादि।

संघ लोक सेवा आयोग हर साल एक अखिल भारतीय परीक्षा का आयोजन करता है, जिसे सिविल सेवा परीक्षा के नाम से जाना जाता है। यह परीक्षा तीन चरणों में होती है- प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार। प्रारंभिक परीक्षा एक स्क्रीनिंग टेस्ट है, जिसकी प्रकृति वस्तुनिष्ठ एवं वैकल्पिक प्रकार की होती है। मुख्य परीक्षा लिखित परीक्षा है, जिसमें अध्ययन की गहराई तथा विश्लेषण क्षमता का परीक्षण होता है। परीक्षा के अंतिम चरण में साक्षात्कार के जरिए परीक्षार्थी के व्यक्तित्व के गुणों और समसामयिक जागरूकता की जांच की जाती है।

प्रमुख सिविल सेवा परीक्षाएं हैं:

आईएएस (भारतीय प्रशासनिक सेवा): आईएएस अधिकारी देश के नीति-निर्माता तथा क्रियान्वयनकर्ता होते हैं। आईएएस सरकार का विभिन्न देशों या अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रतिनिधित्व करते हैं।
 
आईपीएस (भारतीय पुलिस सेवा): आईपीएस की पदस्थापना पुलिस अधीक्षक (सुपरीटेंडेन्ट ऑफ पुलिस, एसपी) के रूप में होती है जोकि लोक सुरक्षा, कानून व्यवस्था, अपराध निवारण, ट्रैफिक नियंत्रण इत्यादि के लिए जिम्मेवार होते हैं। 

आईएफएस (भारतीय विदेश सेवा): एक आईएफएस अधिकारी देश के वाह्य मामलों जैसे कूटनीति, व्यापार, संस्कृति संबंधों से संबंधित कार्यों को संपादित करते हैं। 
 

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