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भारत में प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक

शिक्षण एक महान पेशा है। शिक्षक अपने छात्रों को ज्ञान प्रदान करते हैं। हम में से कई अपने स्कूल के शिक्षकों को याद कर भावुक हो जाते हैं। एक शिक्षक ही एक छात्र का भविष्य तय करता है। यदि आपको शिक्षा और शिक्षण से प्यार है, यदि आप के अंदर ज्ञान को बांटने का भाव है तो आप प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक के रुप में करियर बना सकते हैं। आज हम जो कुछ भी बन गए हैं, उसके लिए शिक्षक जिम्मेदार हैं! किसी भी देश के लिए शिक्षा, उन्नति का मार्ग प्रदर्शित करती है, शिक्षा के महत्व को समझते हुए भारत सरकार ने वर्ष 2010 में शिक्षा का अधिकार लागू किया है , इसके अंतर्गत 6 वर्ष से 14 वर्ष तक के बच्चों को निःशुल्क शिक्षा प्रदान की जाती है, भारत में शिक्षा प्रदान करने के लिए इसको प्राथमिक स्तर, उच्च प्राथमिक स्तर, माध्यमिक स्तर, विश्वविद्यालय स्तर में विभाजित किया गया है | भारत में एक प्राथमिक शिक्षक प्राथमिक कक्षाओं (कक्षा 1-5) तक पढ़ाने के लिए योग्य होता है। वह भविष्य के लिए छात्रों की नींव तैयार करता है।

प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों के लिए कौशल

उत्कृष्ट संचार और पारस्परिक क्षमताः प्राथमिक शिक्षकों के अंदर अच्छा संचार कौशल होना चाहिए। उन्हें बच्चों की समस्याओं को सुलझाने के लिए संचार की आवश्यकता होती है।

अच्छा संगठनात्मक और समय-प्रबंधन कौशलः प्राथमिक शिक्षक को अच्छे प्रंबध कौशल की आवश्यकता होती है ताकि वह बच्चों को प्राथमिक स्तर पर समय का प्रबंध करना सिखा सकें।

ऊर्जा, उत्साह, सहनशक्तिः प्राथमिक शिक्षक के भीतर ऊर्जा, उत्साह, सहनशक्ति होनी चाहिए। छोटे बच्चों को पढ़ाते समय ऊर्जा, उत्साह, सहनशक्ति की आवश्यकता होती है। उन्हें समझाने में समय लग सकता है इसके लिए उर्जा और सहनशक्ति का होना जरुरी है।

धैर्य, समर्पण, लचीलापन और आत्म-अनुशासनः अक्सर छोटे बच्चों को संभालना मुश्किल होता है। उन्हें किसी भी चीज के बारे में समझाने में समय लग सकता है इसके लिए प्राथमिक शिक्षकों के भीतर धैर्य और समर्पण होना चाहिए।

पहल, नेतृत्व और पर्यवेक्षी कौशलः प्राथमिक शिक्षक बच्चों के पहले शिक्षक होते हैं उन्हें अच्छा नेतृत्व करना चाहिए ताकि बच्चों पर अच्छा प्रभाव पड़े।

कल्पना और रचनात्मकताः बच्चों को समझाने के लिए रचनात्मकता की आवश्यकता होती है इसके लिए कल्पना शक्ति का होना बहुत जरुरी है।

प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों की भूमिका

  • पाठ्यक्रम के एक विशिष्ट क्षेत्र के भीतर गतिविधियों और संसाधनों का समन्वय करना,
  • पाठ योजनाओं का विकास करना।
  • बच्चों के लिए गतिविधियों और चार्ट तैयार करना।
  • नियमित आधार पर आकलन करना।
  • ऐसे पाठ प्रस्तुत करना जो कक्षा के भीतर संपूर्ण क्षमता सीमा की जरूरतों को पूरा करते हैं।
  • माता-पिता को समय-समय पर प्रतिक्रिया प्रदान करना।

शैक्षणिक योग्यता

प्राथमिक विद्यालय के विषयों में मुख्य विषयों के रूप में अंग्रेजी, हिंदी, सामाजिक विज्ञान, विज्ञान, गणित शामिल हैं। कुछ अन्य विषय जो इस स्तर पर पढ़ाए जाते हैं, वे हैं मोरल एजुकेशन, कंप्यूटर साइंस, जनरल नॉलेज, दूसरी भाषाएँ जैसे फ्रेंच, जर्मन, स्पेनिश और संस्कृत, आर्ट्स एंड क्राफ्ट, म्यूजिक और डांस। प्राथमिक कक्षाओं को पढ़ाने में सक्षम होने के लिए शिक्षक के पास स्कूल के किसी भी शिक्षण विषय में स्नातक की न्यूनतम योग्यता होनी चाहिए। इसके अतिरिक्त, उसके पास एक बीएड की डिग्री होनी चाहिए या उसे पीटीटी (प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षण) पूरा करना चाहिए था। ये परीक्षण उन उम्मीदवारों के लिए आयोजित किए जाते हैं जो शिक्षण के लिए प्राथमिक स्कूलों (कक्षा 1 से 5) में शामिल होना चाहते हैं। 

प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों की करियर संभावनाएं 

सभी सरकारी और निजी स्कूलों को योग्य और प्रशिक्षित प्राथमिक शिक्षकों की आवश्यकता होती है। निजी स्कूलों में पढ़ाने के लिए, किसी के पास अनुभव होना चाहिए और उसे स्वयं के परीक्षण और साक्षात्कार पास करना चाहिए। यह मानना गलत है कि बीएड अथवा एमएड करके टीचर अथवा लेक्चरर ही बना जा सकता है। आप बीएड, एमएड इत्यादि करने के पश्चात एमफिल या पीएचडी भी इसी विषय से कर सकते हैं। इस क्षेत्र में अनुभव रखते हुए आप सुपरवाइजर, इंचार्ज, उप-प्रधानाचार्य, प्रधानाचार्य, चेयरमैन, निरीक्षक अधिकारी, इंस्पेक्टर, असिस्टेंट ऑफिसर, डेवलपमेंट ऑफिसर, एजुकेशन चीफ ऑफिसर, प्रबंधक, काउंसलर इत्यादि भी बन सकते हैं।

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