न्यूरोसाइंटिस्ट

क्या आप चुनौतियों का सामना करना चाहते हैं  एवं अत्याधुनिक अनुसंधान में भाग लेना चाहते हैं? हमारे द्वारा किए जाने वाले हर काम में दिमाग शामिल होता है। हम जो भी कार्य करते हैं उसके पीछे हमारा मस्तिष्क ही काम करता है जो हमें सूचनाएं देता रहता है। अपने पैसे के बारे में निर्णय लेने से लेकर, नए कौशल सीखने, मोटर ठीक करने, खेलने एवं पढ़ने के लिए भी हमें मस्तिष्क के कौशल की आवश्यकता होती है। यदि आपका दिमाग भी नई चीजों को सिखने और करने के लिए उत्साहित रहता है तो आप न्यूरोसाइंटिस्ट के रुप में करियर बना सकते हैं। न्यूरो साइंस विभिन्न उद्योगों में और सबसे अधिक व्यवसायों में से एक में काम करने का अवसर प्रदान करता है।

जैविक विज्ञान की यह विशेष शाखा चिकित्सा, दवा और वैज्ञानिक क्षेत्रों को मात देती है और  न्यूरोसाइंस जिसे तंत्रिका विज्ञान  भी कहा जाता है इसमें करियर की अनेक संभावनाएं है। यहां तक ​​कि जब अर्थव्यवस्था चरमरा रही है, तो हमेशा मुकाबला करने के लिए बीमारियां होंगी और बस वहीं जहां एक न्यूरोसाइंटिस्ट चिकित्सा और दवा खोजों की भव्य योजना में फिट बैठता है। न्यूरोसाइंस में एक करियर रोजगार का एक विशेष क्षेत्र है क्योंकि यह तंत्रिका विज्ञान का अध्ययन है कि मस्तिष्क में न्यूरॉन्स का संचरण कैसे व्यवहार को प्रभावित करता है। न्यूरोलॉजी में विभिन्न प्रकार के सिरदर्द, मिर्गी, स्ट्रोक, माइग्रेन, वरटाइगो, पर्किन्सन, न्यूरोपैथी, ब्रेन हैम्रेज, डिमेंसिया जैसे रोगों का इलाज होता है। विशेषज्ञों के अनुसार लगभग 10 फीसदी आबादी न्यूरोलॉजी से संबंधित किसी न किसी रोग से पीड़ित है। समय पर ध्यान नहीं दिया जाए तो बाद में ये बड़ी परेशानी का सबब बन जाते हैं। इसके लिए इनका उपचार न्यूरोसाइंटिस्ट ही करते हैं। 
         

न्यूरोसाइंटिस्ट के कार्य

 नसें या तंत्रिकाएं (स्नायु) सिर्फ शरीर की संवेदनाओं की वाहक नहीं होती, बल्कि मस्तिष्क का महत्वपूर्ण भाग भी होती हैं। नसों के रोगियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। तंत्रिका विज्ञान या न्यूरोलॉजी तंत्रिका तंत्र के रोगों से संबंधित रोगों का क्षेत्र है। मिर्गी, सिरदर्द और सायटिका दर्द जैसे रोग स्नायु रोग होते हैं। आमतौर पर इनके उपचार के लिए न्यूरोलॉजिस्ट की मदद लेनी पड़ती है, लेकिन सर्जरी की आवश्यकता हो तो न्यूरोसर्जन के पास भी जाना पड़ सकता है। दवाओं आदि से स्नायु रोग ठीक न हो पाने की स्थिति में न्यूरोसर्जरी करना जरूरी हो जाता है। तंत्रिका विज्ञान (न्यूरोसाइंटिस्ट) तन्त्रिका तन्त्र के वैज्ञानिक अध्ययन को कहते हैं। पारम्परिक रूप से यह जीवविज्ञान की शाखा माना जाता था लेकिन अब रसायन शास्त्र, संज्ञान शास्त्र, कम्प्यूटर विज्ञान, अभियान्त्रिकी, भाषाविज्ञान, गणित, आयुर्विज्ञान, आनुवंशिकी और अन्य सम्बन्धित विषयों (जैसे कि दर्शनशास्त्र, भौतिकी और मनोविज्ञान) के अंतर्विषयक सहयोग द्वारा परिभाषित है। 

न्यूरोसाइंटिस्ट की भूमिका

  • डेटा एकत्र करना, मूल्यांकन करना और डेटा का विश्लेषण करना।
  • जानकारी इकट्ठा करना और उनका महत्वपूर्ण अवलोकन करना।
  • मौखिक प्रस्तुतियाँ करना।
  • अनुसंधान का संचालन करना और रिपोर्ट तैयार करना / लिखना।
  • अनुसंधान पद्धति सीखना।
  •  समस्या को हल करने और रिकॉर्ड को रखने में  सक्षम होना।

न्यूरोसाइंटिस्ट के कौशल

आपको अपने पेशेवर कार्यों को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए कई कठिन और नरम कौशल पर भरोसा करने की आवश्यकता होगी। जो इस प्रकार हैंः

महत्वपूर्ण सोच: गंभीर रूप से सोचने की क्षमता न्यूरोसाइंटिस्ट होने के लिए आवश्यक एक महत्वपूर्ण कौशल है।

सूचित वैज्ञानिक निर्णय: समस्याओं को हल करने के लिए वैज्ञानिक नियमों और रणनीतियों का उपयोग करना और सूचित निर्णय लेने की क्षमता भी होनी चाहिए।

संचार: स्पष्ट और संक्षिप्त रूप से जटिल जानकारी संवाद करने की क्षमता होनी चाहिए।

गणितीय और अवधारणा को समझना: अवधारणाओं, विचारों और गणितीय व्यवस्था के बीच पैटर्न को पहचानने की क्षमता होनी चाहिए।

सीखने की रणनीतियांः नई चीजों को सीखने के लिए सर्वोत्तम प्रशिक्षण या शिक्षण रणनीतियों का उपयोग करना आना चाहिए।

रीज़निंग कौशल: जटिल समस्याओं के लिए डिडक्टिव और इंडक्टिव रीजनिंग स्किल  की क्षमता होनी चाहिए।

न्यूरोसाइंटिस्ट की शैक्षणिक योग्यता

न्यूरोसाइंटिस्ट बनने के लिए किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान से न्यूरोसाइंस में एम.एससी करने की आवश्यकता होती है। इसके लिएस सर्वप्रथम कक्षा 12 वीं के स्तर पर विज्ञान विषय के साथ उत्तरीण होना आवश्यक है। इसके बाद स्नातक स्तर पर न्यूरोसाइंस में डिग्री हासिल की जा सकती है। सायन विज्ञान के साथ बायोलॉजी, बायोटेक्नोलॉजी, बायोकैमिस्ट्री, न्यूरोबायोलॉजी, न्यूरोसाइंस या ज़ेडोलॉजी में स्नातक डिग्री कार्यक्रम पूरा करना भी आवश्यक है।

भारत में न्यूरोसाइंटिस्ट की करियर संभावनाएं

न्यूरोसाइंस में अनुसंधान भारत में उपलब्ध है और कुछ महान शोध में लगे हुए कुछ संस्थान हैं। यह क्षेत्र चिकित्सा और गैर-चिकित्सा दोनों प्रकार के करियर विकल्प प्रदान करता है। न्यूरो सर्जन में न्यूरो सर्जन, न्यूरो फिजीशियन या न्यूरोलॉजिस्ट, न्यूरो एनेस्थेटिस्ट, न्यूरो पैथोलॉजिस्ट, न्यूरो रेडियोलॉजिस्ट, न्यूरो फिजियोलॉजिस्ट, मनोचिकित्सक, क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट, फिजियो, रिहैब और ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट हैं। आप इन क्षेत्रों में न्यूरोसाइंटिस्ट के रुप में करियर बना सकते हैं।

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