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लैंडस्केप आर्किटेक्चर

गगनचुंबी इमारतों, मल्टीप्लेक्सों, कलात्मक एवं भव्य मंदिरों, मालों आदि को बनाने के पीछे आर्किटेक्ट का ही हाथ होता है। जिसकी योजनाओं और रणनीति पर अमल कर इस तरह के निर्माण कार्य संपन्न किए जाते हैं। इस हुनर को आर्किटेक्चर के नाम से जाना जाता है या यूं कहें कि आर्किटेक्चर रचनात्मक कौशल का प्रयोग कर डिजाइनिंग तथा भवन निर्माण करने की कला का नाम है। सामाजिक, तकनीकी और पर्यावरणीय स्थितियों को ध्यान में रखते हुए इमारतों के निर्माण तथा कला-विज्ञान का मिला-जुला रूप ही आर्किटेक्चर कहलाता है। आर्किटेक्ट इमारतों और अन्य संरचनाओं के निर्माण, योजना और डिजाइन के लिए इंजीनियरिंग सिद्धांतों को लागू करते हैं। कुछ आर्किटेक्ट लैंडस्केप आर्किटेक्चर के विशेषज्ञ होते हैं। ये आर्किटेक्ट लैंडस्केप, गार्डन या अलग स्पेस की प्लानिंग, डिजाइन और डायरेक्शन का काम करते हैं। लैंडस्केप आर्किटेक्चर आर्किटेक्चर का ही एक अंग है, जिसमें सार्वजनिक स्थलों, लैंडमार्क्स या पार्क्स आदि को डिजाइन करना, उनकी प्लानिंग करना और उनका मैनेजमेंट शामिल होता है। लैंडस्केप आर्किटेक्ट्स अपनी विशेषज्ञता के जरिए जगह की जरूरत को देखते हुए ऐसी डिजाइन तैयार करते हैं, जो देखने में आकर्षक होती हैं। इसमें हरियाली का भी खास ख्याल रखा जाता है।

लैंडस्केप आर्किटेक्चर की भूमिका

पर्यावरण को बेहतर बनाने और सार्वजनिक स्थलों को आकर्षक बनाने के लिए अब 'ग्रीन इन्फ्रास्ट्रक्चर' पर जोर दिया जा रहा है। यह इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के लिए कौशलयुक्त पेशेवरों की जरूरत होती है, जिन्हें लैंडस्केप आर्किटेक्ट्स कहा जाता है। अगर आपको आर्किटेक्चर में रुचि है और आप पर्यावरण को बेहतर बनाने में अपना योगदान देना चाहते हैं, तो यह फील्ड आपके लिए परफेक्ट है। आर्किटेक्ट अन्य इंजीनियरों और आर्किटेक्ट्स के साथ टीम में काम करते हैं, जो फंक्शन लेआउट या बिल्डिंग या प्रोजेक्ट के सौंदर्यशास्त्र पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

आर्किटेक्ट कई क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करते हैं:

इमारतों की संरचनात्मक अखंडता
डिजाइन और हीटिंग, वेंटिलेटिंग और एयर कंडीशनिंग सिस्टम का विश्लेषण,
दक्षता और पाइपलाइन, अग्नि सुरक्षा और विद्युत प्रणालियों के डिजाइन,
ध्वनिक और प्रकाश योजना, और
ऊर्जा संरक्षण के मुद्दे।

लैंडस्केप आर्किटेक्ट्स के लिए आवश्यक कौशल

शैक्षणिक योग्यता: आर्किटेक्ट्स एंड लैंडस्केप आर्किटेक्ट्स में करियर बनाने के लिए 12वीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स विषय होना जरूरी है। इसके बाद आप बैचलर इन आर्किटेक्चर एंड प्लानिंग, बैचलर ऑफ लैंडस्केप आर्किटेक्चर या बैचलर ऑफ साइंस इन लैंडस्केप आर्किटेक्चर का कोर्स कर सकते हैं। आर्किटेक्ट्स के पास मास्टर डिग्री या स्नातक की डिग्री होना आवश्यक है, अर्थात आर्किटेक्ट्स एंड लैंडस्केप आर्किटेक्ट्स के रूप में काम शुरू करने के लिए एम आर्च./बी आर्च होना जरुरी है। वास्तु इंजीनियरिंग में प्रशिक्षण के अलावा सफल क्षमता होने के लिए निम्नलिखित क्षमताओं का होना आवश्यक है-

विश्लेषणात्मक कौशल: आर्किटेक्ट्स को डिजाइन सामग्री और इसके संदर्भ को समझना चाहिए, उदाहरण के लिए भवन निर्माण पर्यावरण पर एक यांत्रिक प्रणाली कैसे प्रभाव डालेगी यह उसे पता होना चाहिए।

रचनात्मकता: वास्तुकला में सफल होने की कुंजी यह है कि आपका डिज़ाइन आंखों को प्रसन्न करने वाला होना चाहिए।

तकनीकी कौशल: कंप्यूटर एडेड डिजाइन और ड्राफ्टिंग (सीएडीडी) कार्यक्रमों में योग्यता होनी चाहिए।

संचार कौशल: आर्किटेक्ट को मौखिक और लिखित दोनों तरह के अच्छे संचारक की आवश्यकता होती है ताकि साथी कर्मी आपको सुन सकें और प्रभावी परिणाम प्राप्त करने के लिए आपके डिजाइनों को समझ सकें।

भारत में लैंडस्केप आर्किटेक्चर का क्षेत्र

लैंडस्केप आर्किटेक्चर के स्कोप में शहरी नियोजन, साइट नियोजन, पर्यावरण नियोजन, रियल एस्टेट योजना, ग्रीन इन्फ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग और कई और अधिक शामिल हैं। भारत अब जोरदार तरीके से रियल एस्टेट प्लानिंग में जुट रहा है, जिससे फोरलैंडस्केप आर्किटेक्ट की मांग दिनों दिन बढ़ती जा रही है। लैंडस्केप आर्किटेक्ट सीवी डेवलपमेंट, शहरी डिजाइन, वाणिज्यिक, औद्योगिक और पर्यटन विकास, और आवासीय और जीवन शैली उपविभाग सहित परियोजनाओं की एक विस्तृत श्रृंखला पर लीड पेशेवरों और विशेषज्ञ साइट डिजाइनर के रूप में दोनों काम करते हैं। लैंडस्केप आर्किटेक्ट के रूप में आप इन क्षेत्रों में काम कर सकते हैं:

जनपद अभियांत्रिकी
आर्किटेक्ट्स
ड्राफ्टर
निर्माण प्रबंधक
इंटीरियर डिजाइनर
शहरी और क्षेत्रीय योजनाएँ
लैंडस्केप आर्किटेक्ट, 
साइट डिजाइनर, 
सिविल इंजीनियर, 
आर्किटेक्ट मैनेजर, 
लैंडस्केप कंसल्टेंट, लैंडस्केप आर्किटेक्ट सुपरवाइजर 

आदि के तौर पर काम कर सकते है। इस फील्ड में सफल होने के लिए आपमें क्रिएटिविटी के साथ-साथ डिजाइन को समझने का एप्टिट्यूड भी होना चाहिए। इसके अलावा अलग-अलग तरह के पौधों के बारे में अच्छी जानकारी होनी चाहिए।

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